मुंबई: भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र ने इतिहास का सबसे मजबूत वित्तीय वर्ष दर्ज किया है, जहां सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट अत्यंत सुदृढ़ हुई है।
1. ऐतिहासिक लाभ एवं एनपीए में रिकॉर्ड गिरावट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल शुद्ध लाभ 1.5 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। बैंकों का ग्रॉस एनपीए (GNPAs) घटकर 12 साल के निचले स्तर (2.8%) पर आ गया है, जो मजबूत जोखिम प्रबंधन और डिजिटल रिकवरी का प्रमाण है।
2. प्रमुख वित्तीय एवं तकनीकी उपलब्धियां
- यूपीआई एवं सीबीडीसी का अंतरराष्ट्रीय विस्तार: भारतीय रिजर्व बैंक ने भारतीय रुपये में सीधे सीमा पार व्यापार और पर्यटकों के लिए यूपीआई भुगतान को सुगम बनाने हेतु 4 नए देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ समझौता किया है।
- एसबीआई और पीएनबी का डिजिटल विस्तार: कृषि अवसंरचना, ग्रामीण वेयरहाउसिंग और महिला उद्यमियों के लिए 25,000 करोड़ का रियायती ऋण पूल तैयार किया गया है।
- नाबार्ड का ग्रीन बॉन्ड: पर्यावरण अनुकूल सिंचाई और प्राकृतिक खेती परियोजनाओं के लिए जारी 10,000 करोड़ रुपये के ग्रीन बॉन्ड को संस्थागत निवेशकों द्वारा भारी समर्थन मिला।
- एमएसएमई के लिए 59 मिनट में लोन: बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक ने जीएसटी डेटा और कैश-फ्लो के आधार पर छोटे व्यापारियों को 5 करोड़ तक के इंस्टेंट इन-प्रिंसिपल डिजिटल लोन की सुविधा दी है।
3. आगे का परिदृश्य
वैश्विक रेटिंग एजेंसियों (मूडीज, एसएंडपी) ने भारतीय वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और लचीलेपन की सराहना करते हुए इसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे सुरक्षित बैंकिंग तंत्र करार दिया है।
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