नई दिल्ली: भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल एवं गैस उत्पादक महारत्न कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू उत्पादन को लेकर बड़ा बयान दिया है। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें दीर्घावधि में 75 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने की उम्मीद है, जिससे गहरे समुद्र (Deepwater Blocks) में जटिल ड्रिलिंग परियोजनाएं पूरी तरह से आर्थिक रूप से व्यावहारिक (Economically Viable) बन गई हैं।
केजी बेसिन (KG-DWN-98/2) से रिकॉर्ड उत्पादन की तैयारी
ओएनजीसी के वरिष्ठ नेतृत्व ने संकेत दिया कि बंगाल की खाड़ी में स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन के गहरे पानी के ब्लॉक KG-DWN-98/2 से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन तय समयसीमा के भीतर अपने पीक स्तर पर पहुंचने की ओर अग्रसर है। डीपवाटर परियोजनाओं में तकनीकी जटिलता और पूंजीगत व्यय (Capex) अधिक होता है, लेकिन वर्तमान वैश्विक मूल्य परिदृश्य में यह निवेश भारत के आयात बिल को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां (Key Highlights)
- 1. आत्मनिर्भर ऊर्जा लक्ष्य: भारत वर्तमान में अपनी 85% से अधिक कच्चे तेल की ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ओएनजीसी के नए डीपवाटर उत्पादन से घरेलू उपलब्धता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।
- 2. नई पीढ़ी की फ्लोटिंग उत्पादन प्रणालियां (FPSO): कंपनी अत्याधुनिक 'आर्मडा स्टर्लिंग वी' (Armada Sterling V) एफपीएसओ पोत के माध्यम से प्रतिदिन हजारों बैरल कच्चे तेल का स्थिर प्रसंस्करण कर रही है।
- 3. वित्तीय मजबूती एवं कैपेक्स: वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कंपनी ने गहरे पानी के अन्वेषण (Exploration) और नए कुओं की ड्रिलिंग के लिए 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का कैपेक्स निर्धारित किया है।
- 4. ग्रीन एनर्जी एवं पेट्रोकेमिकल विस्तार: पारंपरिक ईएंडपी (E&P) के साथ-साथ ओएनजीसी ग्रीन हाइड्रोजन, ऑफशोर विंड और ओपेक-स्तर के पेट्रोकेमिकल संयंत्रों में निवेश बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओएनजीसी की यह आक्रामक अन्वेषण रणनीति न केवल कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करेगी बल्कि देश के ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी बल प्रदान करेगी।
Comments ()
No comments yet. Be the first to share your thoughts!