मुंबई / नई दिल्ली: भारतीय कॉर्पोरेट जगत और उद्योग परिसंघ देश में विनिर्माण, पूंजी बाजार, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और एमएसएमई सशक्तिकरण की दिशा में नए मानक स्थापित कर रहे हैं।
1. एमएसएमई पूंजी सहयोग एवं बाजार साझेदारी
देश के अग्रणी स्टॉक एक्सचेंज बीएसई (BSE) और प्रमुख उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) के बीच संपन्न रणनीतिक समझौते से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को शेयर बाजार से इक्विटी पूंजी जुटाने और कॉर्पोरेट प्रशासन के वैश्विक मानक अपनाने में बड़ी मदद मिलेगी।
2. मुख्य औद्योगिक रुझान एवं नीतिगत प्रभाव
- निजी पूंजीगत व्यय (Private Capex) में उछाल: सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन, डेटा सेंटर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर में निजी कंपनियों ने 5 साल का सबसे बड़ा निवेश चक्र शुरू किया है।
- सेबी (SEBI) का नया ईएसजी ढांचा: देश की शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR Core) को अनिवार्य कर विदेशी संस्थागत निवेशकों का भरोसा बढ़ाया गया है।
- ग्रीन स्टील और सतत ऊर्जा: भारतीय इस्पात और सीमेंट उद्योगों ने कार्बन उत्सर्जन में 80% तक कटौती के लिए हरित हाइड्रोजन और सीसीएस (Carbon Capture) तकनीकों का सफल परीक्षण शुरू किया है।
- पीएलआई (PLI) स्कीम की सफलता: इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल विनिर्माण में 5 लाख करोड़ से अधिक के उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात ने भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बना दिया है।
3. उद्योग विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
उद्योग मंडल सीआईआई और फिक्की के अनुसार, मजबूत बैंकिंग बैलेंस शीट और अनुकूल सरकारी नीतियों के चलते भारत अगले दशक तक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।
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